क्या आपने कभी भक्ति को सड़कों पर उतरते देखा है?
क्या आपने कभी हजारों कदमों को एक साथ ‘जय श्री राम‘ के उद्घोष में थरथराते देखा है?
क्या आपने महसूस किया है भगवा ध्वज की वो लहर, जो केवल कपड़ा नहीं, बल्कि आस्था की शपथ होती है?
अगर नहीं… तो अब समय है देखने का —
“बागेश्वर धाम सनातन एकता पदयात्रा” — वो आध्यात्मिक ज्वाला जिसने पूरे भारत में सनातन चेतना की चिंगारी जलाई है।
यह कोई आम यात्रा नहीं…
यह है आस्था का महासंगम,
जहाँ भक्त सिर झुकाकर नहीं, ध्वज उठाकर चल रहे हैं।
जहाँ हर कदम पर ‘हनुमान चालीसा’ गूंजती है
और हर दिल में बस एक ही मंत्र है —
“एक सनातन, एक भारत”।
बागेश्वर धाम सरकार के पूज्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी के नेतृत्व में, बागेश्वर धाम सनातन एकता पदयात्रा सनातन धर्म की अखंड ज्योति को लेकर निकली है
जिसका उद्देश्य केवल मंज़िल तक पहुँचना नहीं
बल्कि राष्ट्र को आध्यात्मिक रूप से पुनर्जाग्रत करना है।
🚩 क्या आपने वो दृश्य देखा है जब एकता, भक्ति और राष्ट्रप्रेम एक ही राह पर चलते हैं?
🚩 क्या आपने कभी ऐसा आंदोलन देखा है जिसमें हर भक्त एक चलता-फिरता मंदिर बन जाता है?
अगर नहीं,
तो यह ब्लॉग पोस्ट आपको बागेश्वर धाम सनातन एकता पदयात्रा के हर रंग, हर स्वर और हर आस्था की गहराई से परिचित कराएगा…
जिसे इतिहास में “सनातन की सबसे बड़ी पुकार” कहा जाएगा।
पढ़ते रहिए — क्योंकि बागेश्वर धाम सनातन एकता पदयात्रा केवल एक यात्रा नहीं, यह एक युग की शुरुआत है।
Table of Contents
बागेश्वर धाम सनातन एकता पदयात्रा क्या है?
यह पदयात्रा बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी के नेतृत्व में निकल रही है। उनका लक्ष्य सनातन धर्म की एकीकृत पहचान को मजबूत करना और भारत को को हिन्दू राष्ट्र बनाना है है। यह पैदल यात्रा श्रद्धालुओं को सामूहिक प्रयास, प्रार्थना और धर्म के सिद्धांतों के प्रति पुन: समर्पण का अवसर देती है।
सनातन एकता पदयात्रा का मुख्य संदेश स्पष्ट है — धर्म के विविध रूप, परंपराएँ और समुदाय मिलकर भी एक परिवार हो सकते हैं।
“बागेश्वर धाम सनातन एकता पदयात्रा” नाम ही इस भावना को दर्शाता है कि एक साथ चलकर सामाजिक और आध्यात्मिक एकजुटता को बढ़ाया जा सकता है।
बागेश्वर धाम सनातन एकता पदयात्रा सेवा आधारित अध्यात्म, जन-जागरूकता, सामाजिक-धार्मिक कार्यक्रम को भी बढ़ावा देती है इस प्रकार केवल आयोजन न होकर जन-आंदोलन बन जाती है।
संकल्प और आह्वान – क्यों हो रही है यह पदयात्रा?
पंडित श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी के विचारों में, सनातन एकता केवल एक धार्मिक नारा नहीं है, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा, सामाजिक उत्थान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक अनिवार्य शर्त है। उनके अनुसार, सनातनियों का एकजुट होना इसलिए आवश्यक है क्योंकि बागेश्वर धाम सनातन एकता पदयात्रा आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उनका स्पष्ट कहना है कि “जाति के नाम पर बँटे रहना हिंदू समाज का सबसे बड़ा ज़हर है।” जब तक हिंदू आपस में ही ऊंच-नीच और छुआछूत की दीवारों में बँटे रहेंगे, तब तक बाहरी शक्तियाँ इसका फायदा उठाती रहेंगी।
पंडित श्री धीरेंद्र शास्त्री जी सनातन एकता को हिंदू राष्ट्र बनाने की वैचारिक यात्रा मानते हैं। उनका तर्क है कि जब 1947 में धर्म के नाम पर देश का एक हिस्सा बँट गया, तो शेष राष्ट्र को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए वैचारिक रूप से एकजुट होना अनिवार्य है।
उनका मानना है कि धर्म से राजनीति चलनी चाहिए, लेकिन राजनीति से धर्म नहीं। सनातन एकता आध्यात्मिक विचारधारा पर आधारित है, जिसका मूल रामानंदाचार्य की परंपरा में निहित है—“हम हिंदू हैं, हिंदुत्ववादी हैं, हिंदुस्तान हमारा है।”
पंडित श्री धीरेंद्र शास्त्री जी के अनुसार, सनातन एकता इसलिए ज़रूरी है ताकि हिंदू समाज आंतरिक रूप से जातिवाद के ज़हर से मुक्त हो सके, बाहरी रूप से अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा कर सके, और सामूहिक रूप से राष्ट्र और धर्म के उत्थान में अपनी निर्णायक भूमिका निभा सके।
रथ क्यों ? रथी कौन? सनातन विजय' की रणनीति :
बागेश्वर धाम सनातन एकता पदयात्रा का आयोजन मात्र एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है , यह पूज्य धीरेंद्र शास्त्री जी की दूरदर्शिता और ‘सनातन विजय’ के लक्ष्य को साधने की एक सोची-समझी रणनीति है। इस अभियान को महाभारत के युद्ध की तरह ही, प्रतीकों और व्यवस्था के साथ संचालित किया जाता है। यहाँ इस रणनीति के दो मुख्य स्तंभों को समझा जा सकता है:
प्रतीकात्मक अर्थ – 'रथ' क्यों और 'रथी' कौन?
रथ : हिंदू एकता का संकल्प :- रथ केवल वाहन नहीं, बल्कि गुरुजी के ‘हिंदू राष्ट्र’ संकल्प का प्रतीक है। इसे भक्तों द्वारा खींचना यह दर्शाता है कि यह लक्ष्य किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज के सामूहिक प्रयास और श्रम से ही पूरा होगा।
रथी :पं. धीरेंद्र शास्त्री जी:- वह इस वैचारिक युद्ध के प्रमुख रणनीतिकार हैं। उनका स्वयं पैदल चलना यह दर्शाता है कि नेता आगे चलकर मार्गदर्शन कर रहा है। उनका नेतृत्व भक्तों को संगठित शक्ति और दिशा प्रदान करता है।
पदयात्री : आम सनातनी जनता :- पदयात्री इस रणनीति की वास्तविक सेना हैं। उनका त्याग और समर्पण ज़मीन पर बदलाव लाने के लिए आवश्यक है। यह दिखाता है कि सनातन की शक्ति महलों में नहीं, बल्कि आम जनता और पसीने में निहित है। |
दो धर्म ध्वज : सुरक्षा और अनुशासन यात्रा में आगे-पीछे चलने वाले दो ध्वज यह सुनिश्चित करते हैं कि सभी पदयात्री एक निश्चित दायरे और अनुशासन में रहें। यह एकता को टूटने नहीं देने की सख्त संगठनात्मक रणनीति है।
रणनीतिक उद्देश्य :
बागेश्वर धाम सनातन एकता पदयात्रा दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के लगभग 400 गाँवों और शहरों से होकर गुज़रती है। यह रणनीति सुनिश्चित करती है कि संदेश केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि उन गाँवों और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुँचे, जहाँ धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना को जगाने की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।
‘जाति तोड़ो’ की मनोवैज्ञानिक रणनीति जातिवाद पर प्रहार पं. धीरेंद्र शास्त्री जी की सबसे प्रभावी रणनीति है। जब लाखों भक्त एक ही पंडाल में, जाति पूछे बिना, एक साथ भोजन करते हैं और रात गुजारते हैं, तो यह सामाजिक समरसता का एक शक्तिशाली मनोवैज्ञानिक संदेश देता है। यह लोगों को अपने सदियों पुराने सामाजिक विभाजनों को छोड़कर एक महान हिंदू पहचान के तहत एकजुट होने के लिए प्रेरित करता है
हनुमान जी और बांके बिहारी जी का मिलन:
बागेश्वर धाम सनातन एकता पदयात्रा बागेश्वर धाम के इष्ट देव हनुमान जी (बालाजी महाराज) और वृंदावन के आराध्य बांके बिहारी जी के मिलन का प्रतीक है। यह यात्रा भक्त और भगवान के बीच की दूरी को कम करने का एक आध्यात्मिक प्रयास है। भक्ति का प्रवाह: 10 दिनों तक निरंतर भजन-कीर्तन, सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ और धार्मिक प्रवचनों का आयोजन, लाखों लोगों को भक्ति के एक अटूट प्रवाह से जोड़ देगा
हिंदू एकता और समरसता (Hindu Unity and Harmony) : यात्रा का केंद्रीय विषय ‘हिंदू एकता’ है।
जातिवाद का निषेध: यह पदयात्रा जातिगत भेदभाव को मिटाने और सभी वर्गों को एक मंच पर लाने का एक सशक्त माध्यम है। बाबा बागेश्वर ने बार-बार कहा है कि ‘जाति के नाम पर बँटे रहना सबसे बड़ा जहर है’।
सामाजिक समरसता: यात्रा का उद्देश्य समाज के हर तबके, यहाँ तक कि विभिन्न मुस्लिम समुदायों के कुछ नेताओं और सदस्यों ने भी इस यात्रा का समर्थन किया है, जिससे इसका सामाजिक समरसता का संदेश और मजबूत होता है।
शास्त्री जी का स्पष्ट मत है कि: “यह यात्रा पूरी शालीनता और प्रेम के साथ निकाली जाएगी। हम केवल हिंदू एकता पर ज़ोर देंगे। उन्हें विश्वास है कि आने वाले 15-20 वर्षों में भारत का भूगोल बदलने वाला है, और सनातनी अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए जागृत होंगे।
पदयात्रा के सप्त-संकल्प :
7 नवंबर से 16 नवंबर 2025 तक में दिल्ली की ऐतिहासिक भूमि से शुरू होकर, ब्रज की पावन भूमि वृंदावन तक चलने वाली यह 10 दिवसीय पदयात्रा, देश और दुनिया के सनातनी समाज को एक सूत्र में पिरोने का एक महासंग्राम है। इस यात्रा का मूल उद्देश्य भारत को ‘परम वैभवशाली हिंदू राष्ट्र’ बनाने की अलख जगाना और सनातन धर्म की एकता को जन-जन तक पहुँचाना है।
2024 की पहली सफल बागेश्वर धाम सनातन एकता पदयात्रा के बाद, यह दूसरा बड़ा चरण है, जिसका व्यापक स्वरूप और भी अधिक महत्वपूर्ण है।
बागेश्वर धाम सनातन एकता पदयात्रा केवल चलने के लिए नहीं है, बल्कि सात बड़े संकल्पों को सिद्ध करने के लिए निकाली जा रही है, जो भारतीय संस्कृति के उत्थान के लिए आवश्यक हैं। पूज्य महाराज श्री ने इन संकल्पों का आह्वान किया है:
श्री धीरेंद्र शास्त्री जी का स्पष्ट संदेश है कि जब तक देश का प्रत्येक सनातनी अपने महत्व को नहीं समझेगा और एकजुट नहीं होगा, तब तक यह प्रयास जारी रहेगा। यह पदयात्रा उसी जनजागरण की एक भव्य कड़ी है।
यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि यह पदयात्रा केवल कुछ किलोमीटर पैदल चलने का शारीरिक व्यायाम मात्र नहीं है; यह एक वैचारिक आंदोलन और राष्ट्र-जागरण का महायज्ञ है। इसका मूल उद्देश्य उन सात बड़े संकल्पों को सिद्ध करना है, जिन्हें पूज्य महाराज श्री (पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी) भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थान के लिए अनिवार्य मानते हैं।
नजागरण की भव्य कड़ी’ का अर्थ पूज्य श्री धीरेंद्र शास्त्री जी का स्पष्ट संदेश है कि यह सांस्कृतिक परिवर्तन किसी एक व्यक्ति या एक संस्था से नहीं आएगा। यह तभी संभव होगा, जब तक देश का प्रत्येक सनातनी अपने महत्व को नहीं समझेगा और एकजुट नहीं होगा। यह पदयात्रा उसी ‘जनजागरण’ की एक ‘भव्य कड़ी’ है।
सनातन एकता पदयात्रा प्रस्तावित रूट मैप
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी की प्रेरणा से आयोजित यह बागेश्वर धाम सनातन एकता पदयात्रा सनातन धर्म की चेतना को जागृत करने तथा सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने की एक ऐतिहासिक पहल है।
7 नवंबर से 16 नवंबर 2025 तक दिल्ली से वृंदावन तक चलने वाली यह पदयात्रा लगभग 170 किलोमीटर लम्बी होगी और दस दिन में पूरी की जाएगी ।
* पदयात्रा का आरंभ:
प्रातः 6:00 से 7:00 बजे के बीच, ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ यात्रा शुरू।
दिन का सफर: प्रतिदिन औसतन 13 से 17 किलोमीटर की पैदल यात्रा।
रास्ते भर धार्मिक भजन, कीर्तन और ‘जय श्री राम’ के नारे।
दोपहर का विश्राम: दोपहर 12:00 से 2:00 बजे के बीच भोजन और विश्राम।
शाम का कार्यक्रम: सायं 4:00 बजे के बाद पड़ाव स्थल पर पहुँचना।
रात्रि कार्यक्रम: पूज्य श्री धीरेंद्र शास्त्री जी का संत समागम, और स्थानीय लोगों से भेंट।
विश्राम : रात 10:00 बजे के बाद अगले दिन की तैयारी के साथ विश्राम।
पदयात्रा के लिए पंजीकरण:
पंजीकरण प्रक्रिया (Registration Process):बागेश्वर धाम सनातन एकता पदयात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की संख्या के प्रबंधन और उनके लिए व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु पंजीकरण अनिवार्य है।
भक्तों को पंजीकरण के लिए दिए गए QR कोड को स्कैन करके या लिंक पर क्लिक करके अपना विवरण भरना होगा।
नोट: रजिस्ट्रेशन के अलावा भी सभी को यात्रा में शामिल होने की अनुमति है, लेकिन पंजीकरण से समिति को संख्या का अनुमान लगाने और आपके लिए भोजन, आवास, और सुरक्षा जैसी व्यवस्थाएँ बेहतर ढंग से करने में मदद मिलती है।
भक्तों के लिए व्यवस्थाएँ
बागेश्वर धाम सनातन एकता पदयात्रा समिति लाखों भक्तों के लिए निःशुल्क और व्यापक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करती है:
आवास (Accommodation) हर पड़ाव पर विशाल मैदानों में अस्थायी शिविर (पंडाल) लगाए जाएँगे, जहाँ रात को विश्राम की व्यवस्था होगी। | |
भोजन और जल (Food & Water) दोनों समय (दोपहर और रात्रि) शुद्ध सात्विक भोजन (प्रसादम) की व्यवस्था निःशुल्क होगी। पीने के पानी के टैंकर और वाटर कूलर जगह-जगह उपलब्ध होंगे। |
चिकित्सा सुविधा (Medical Care) यात्रा मार्ग पर प्राथमिक चिकित्सा शिविर और एम्बुलेंस की व्यवस्था रहेगी। डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ की टीम पूरे समय साथ रहेगी।
सुरक्षा (Security) यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था निजी सुरक्षाकर्मियों और स्वयंसेवकों के साथ मिलकर की जाएगी। महिला सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
शौचालय (Toilets) महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त संख्या में अस्थायी स्वच्छ शौचालयों की व्यवस्था रहेगी।
यात्रा में शामिल होने के लिए नियम और अनुशासन :
- कम सामान: यात्रा लंबी है (131-170 किमी), इसलिए केवल हल्का और आवश्यक सामान ही साथ रखें।
- पहनावा: शालीन, आरामदायक और मौसम के अनुकूल वस्त्र पहनें।
- स्वास्थ्य और तैयारी: पदयात्रा शुरू करने से पहले अपनी फिटनेस का ध्यान रखें।
- अपने साथ आवश्यक दवाइयाँ, प्राथमिक चिकित्सा किट और पानी की बोतल रखें।
- भक्ति से भरा दिल और सनातन पर गर्व करने वाला मन सबसे महत्वपूर्ण तैयारी है।
- यात्रा में किसी भी प्रकार का अस्त्र-शस्त्र लेकर न चलें।
- संपूर्ण यात्रा में शांति, शालीनता और अनुशासन बनाए रखें।
- किसी भी व्यक्तिगत या धार्मिक समूह के खिलाफ कोई भी संवाद या व्यवहार न करें।
- यात्रा के दौरान दो धर्म ध्वज चलेंगे; श्रद्धालुओं को उनके बीच ही रहना होता है।
- पर्यावरण का ध्यान: यात्रा मार्ग पर स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करें और प्लास्टिक के उपयोग से बचें।
यात्रा के प्रमुख आकर्षण :
- संतों का काफिला : देशभर के साधु-संत, धर्माचार्य और महामंडलेश्वर इस यात्रा में शामिल होंगे, जिससे यह एक विशाल ‘संत सम्मेलन’ का रूप लेगी।
- भगवा ध्वज और हनुमान चालीसा : पूरे मार्ग पर भगवा ध्वज लहराएंगे और सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ होगा, जिससे यात्रा का माहौल पूर्णतः भक्तिमय रहेगा।
- राष्ट्रगान और एकता : प्रतिदिन राष्ट्रीय एकता और भाईचारे का संदेश देने के लिए राष्ट्रगान होगा, जो हिंदू राष्ट्र के संकल्प को बल देगा।
- नारी शक्ति की भागीदारी : महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्थाएँ और स्वयंसेविकाएँ होंगी।
जो भक्त शारीरिक रूप से पदयात्रा में शामिल नहीं हो सकते, वे क्या करें :
यह सत्य है कि हर सनातनी इस महायज्ञ (बागेश्वर धाम सनातन एकता पदयात्रा)में अपनी आहुति देना चाहता है, लेकिन स्वास्थ्य, पेशेवर जिम्मेदारियाँ या अन्य कारणों से लाखों भक्त पदयात्रा में शामिल नहीं हो पाते। पूज्य महाराज श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी कहते हैं कि सेवा केवल शरीर से नहीं, भाव और मन से भी होती है। यदि आप किसी भी कारणवश 10 दिवसीय पदयात्रा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं, तो यहाँ कुछ तरीके दिए गए हैं जिनके माध्यम से आप घर बैठे ही इस पुण्य कार्य का हिस्सा बन सकते हैं और यात्रा के उद्देश्यों को पूरा कर सकते हैं:
मन से सेवा : 7 से 16 नवंबर तक प्रतिदिन एक निश्चित समय पर अपने घर के पूजा स्थल पर बैठकर हनुमान चालीसा का 11 या 21 बार पाठ करें। संकल्प लें कि आपका पाठ यात्रा की सफलता और हिंदू राष्ट्र के संकल्प को समर्पित है। |
जन से सेवा : पदयात्रा के संदेश (हिंदू राष्ट्र, एकता, यमुना शुद्धि) को अपने आसपास के लोगों, सोशल मीडिया ग्रुप और रिश्तेदारों तक पहुँचाएँ। जन-जागरण में अपनी भूमिका निभाएँ।
डिजिटल सहभागिता : लाइव प्रसारण देखें , यात्रा के दौरान होने वाले सभी भजन संध्या, प्रवचन और संत समागम का लाइव प्रसारण बागेश्वर धाम सरकार के आधिकारिक यूट्यूब चैनल और संस्कार चैनल पर किया जाएगा। घर बैठे इसे देखना भी यात्रा का हिस्सा बनना है।
सोशल मीडिया से जुड़ें : पदयात्रा से जुड़े वीडियो, फ़ोटो और संकल्पों को अपनी सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल पर अधिक से अधिक साझा करें ,आपकी एक पोस्ट लाखों लोगों तक प्रेरणा पहुँचा सकती है।
दैनिक अपडेट: प्रतिदिन यात्रा के अपडेट्स को फॉलो करें और यात्रा के लिए शुभ संदेश और प्रोत्साहन भक्तों तक पहुँचाएँ।
संकल्प दिवस: 16 नवंबर (समापन दिवस) को अपने क्षेत्र में एक छोटा ‘हिंदू एकता संकल्प दिवस’ आयोजित करें, जहाँ सभी सनातनी एकजुट होकर भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का संकल्प लें।
जातिवाद मिटाओ अभियान: अपने मोहल्ले या गाँव में जातिवाद मिटाने के लिए छोटे संवाद या गोष्ठियाँ आयोजित करें, जो पदयात्रा के मुख्य उद्देश्यों में से एक है। उपस्थित नहीं हो सकते, वे भी दूर रहकर इस विशाल आध्यात्मिक और सामाजिक आंदोलन का एक महत्वपूर्ण अंग बने रहेंगे।
निष्कर्ष :
बागेश्वर धाम सनातन एकता पदयात्रा, पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी के नेतृत्व में एक बार फिर यह सिद्ध करने जा रही है कि सनातन धर्म की जड़ें कितनी गहरी और मजबूत हैं। यह यात्रा केवल एक गंतव्य तक पहुँचना नहीं है, बल्कि देश के 400 से अधिक गाँवों और शहरों में जाकर हिंदू समाज को उसकी पहचान, उसकी शक्ति और उसके गौरव का बोध कराना है।
बागेश्वर धाम सनातन एकता पदयात्रा एक राष्ट्रीय महायज्ञ है, जिसमें हर सनातनी को अपनी आहुति देनी चाहिए। 7 नवंबर से 16 नवंबर 2025 तक चलने वाली यह पदयात्रा, दिल्ली और वृंदावन के बीच एक नया इतिहास रचेगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए ‘हिंदू राष्ट्र’ की नींव को मजबूत करेगी।
जय श्री राम | जय सनातन | जय बागेश्वर धाम |आप इस ब्लॉग पोस्ट को अपने सोशल मीडिया पर साझा करके या प्रिंट करके लाखों सनातनियों तक पहुँचा सकते हैं ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
बागेश्वर धाम सनातन एकता पदयात्रा में शामिल होने से पहले भक्तों के मन में कई सवाल होते हैं। यहाँ सनातन हिंदू एकता पदयात्रा 2025 से जुड़े कुछ प्रमुख प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं:
बागेश्वर धाम पदयात्रा 2025 किस तारीख से किस तारीख तक आयोजित की जा रही है ?
यह पदयात्रा 7 नवंबर 2025 (शुक्रवार) को शुरू होकर 16 नवंबर 2025 (रविवार) को समाप्त होगी। यह कुल 10 दिनों की यात्रा है।
यह पदयात्रा कहाँ से शुरू होगी और कहाँ समाप्त होगी ?
पदयात्रा का शुभारंभ दिल्ली से होगा और इसका समापन वृंदावन धाम में स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर पर होगा।
पदयात्रा की अनुमानित दूरी कितनी है और यह कितने राज्यों से होकर गुजरेगी ?
इस पदयात्रा की अनुमानित दूरी लगभग 131 किलोमीटर से 170 किलोमीटर के बीच है। यह यात्रा मुख्य रूप से दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश राज्यों से होकर गुजरेगी।
क्या पदयात्रा में शामिल होने के लिए पंजीकरण (Registration) कराना अनिवार्य है ?
हाँ, सुरक्षा और व्यवस्था की दृष्टि से आयोजकों द्वारा पंजीकरण कराने की सलाह दी जाती है। आप बागेश्वर धाम सरकार के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल या QR कोड के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। हालाँकि, बिना पंजीकरण के भी भक्तों को शामिल होने की अनुमति है।
क्या यात्रा में भोजन और ठहरने (आवास) की व्यवस्था निःशुल्क होगी ?
हाँ। पदयात्रा में शामिल होने वाले सभी भक्तों के लिए रास्ते भर और रात्रि विश्राम के पड़ावों पर शुद्ध सात्विक भोजन (प्रसादम) और सामूहिक आवास की व्यवस्था बागेश्वर धाम समिति द्वारा निःशुल्क की जाएगी।
महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए क्या विशेष व्यवस्थाएँ की गई हैं ?
महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष स्वयंसेविका दल तैनात रहेगा और पड़ाव स्थलों पर उनके लिए अलग से सुरक्षित आवास (टेंट/पंडाल) की व्यवस्था की जाएगी। आयोजकों ने सभी से यात्रा में शालीनता और अनुशासन बनाए रखने का अनुरोध किया है।
पूज्य श्री धीरेंद्र शास्त्री जी महाराज का दैनिक कार्यक्रम क्या रहेगा ?
महाराज श्री पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे। उनका दैनिक कार्यक्रम इस प्रकार होगा:
दिन में भक्तों के साथ पैदल चलना।
शाम को पड़ाव स्थल पर संत समागम या धार्मिक प्रवचन (और भक्तों से भेंट करना।
क्या मैं किसी भी दिन यात्रा में शामिल हो सकता हूँ या पूरा 10 दिन चलना आवश्यक है ?
आप किसी भी दिन, अपने शहर या सुविधा अनुसार, यात्रा में शामिल हो सकते हैं और अपनी इच्छानुसार दूरी तक चल सकते हैं। हालाँकि, पूर्ण 10 दिनों की यात्रा का हिस्सा बनना एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव होगा